क्यो मनाया जाता है क्रिसमस का त्योहार

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भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में त्योहारों की बड़ी धूम होती है और हर त्योहार को अलग तरीके से मनाया जाता है और इनमें क्रिसमस भी शामिल है।

क्रिसमस 25 दिसंबर को मनाया जाता है और यह एक पवित्र और सांस्कृतिक त्योहार है। क्रिसमस के इतिहास और तारीखों से जुड़े प्रश्न कई बार एग्जाम में भी पूछे जा सकते हैं। क्या आप जानते हैं? अमेरिका में हर साल लगभग 3 अरब क्रिसमस कार्ड भेजे जाते हैं।

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प्रारंभिक रोमन इतिहास के अनुसार, पहली बार ईसा मसीह के जन्म की तारीख 25 दिसंबर को चौथी शताब्दी में बताई गई थी। ऐसा माना जाता है कि क्रिसमस का प्रारंभिक उत्सव रोमन और अन्य यूरोपीय त्योहारों से आया है जो फसल के अंत और शीतकालीन संक्रांति को चिह्नित करते हैं। उन उत्सवों के कुछ रीति-रिवाज जो कायम हैं उनमें घरों को हरियाली से सजाना, उपहार देना, गाने गाना और विशेष भोजन खाना शामिल है।

संता के जीवन के है कई सारे मशहूर किस्से


संत निकोलस के जीवन की कई सारी कहानियां ऐसी हैं जो बेहद चर्चित हैं जिनमें उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मदद करके उन्हें रातों रात मालामाल कर दिया।

एक ऐसी ही मशहूर कहानी एक गरीब व्यक्ति की है जिसकी तीन बेटियां थी। वह व्यक्ति इतना ज्यादा गरीब था कि अपनी बेटियों को दो वक्त का भोजन भी देने में समर्थ नहीं हो पा रहा था। ऐसे में वे उनकी शादियों के लिए चिंतित था वह उनकी शादी कैसे कर पाता है उसके पास खाने के लिए पैसे नहीं थे मजबूरन वह अपनी बेटियों को नौकरी कराने पर मजबूर था परंतु बहुत मशक्कत के बाद भी उन्हें कोई नौकरी नहीं मिल रही तब उसने अपनी बेटियों को व्यापार की ओर जाने का रास्ता दिखाया।

जैसे ही यह बात संत निकोलस को पता चली तो उन्होंने आधी रात में जाकर उन लड़कियों के घर में जाकर उन की जुराब के अंदर चुपचाप सोने के सिक्कों से भरी थैलियां रख दी। उसके बाद उनकी दरिद्रता खत्म हो गई और उन्होंने खुशी खुशी अपनी बेटियों की शादी भी की और उन्हें सुखी जीवन प्रदान किया।

कहते हैं उस दिन की घटना के बाद से ही क्रिसमस की रात बच्चे इस उम्मीद से मोजे बाहर लटका आते हैं कि सुबह उनमें उन्हें उनके मनपसंद गिफ्ट मिलेंगे। फ्रांस में तो चिमनी पर लाल रंग के जूते लटकाए जाते हैं जिसमें सांता आकर गिफ्ट डालते हैं। ऐसी प्रथा वर्षों से ही चली आई है। सेंटा रेडीयर्स पर चलते हैं इसलिए फ्रांस के बच्चे तो रेडियंस के लिए जूतों में गाजर भर कर रखते हैं।

 

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Chief Editor - अख्तर हुसैन https://newsdilsebharat.com

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